लेनिन रघुवंशी
20फरवरी 2011 को नई सब्जी मंडी समिति मैदान, राबर्टसगंज, जिला सोनभद्र में जन अदालत आयोजित की गयी। जिसमें पी.वी.सी.एच.आर., ग्राम्या, सोनभद्र विकास समिति, आई.पी.टी. तथा उ0प्र0 ग्राम्य व खेतिहर मजदूर यूनियन ,लखनऊ के संयुक्त सहयोग द्वारा आयोजित किया गया। जिसमें भूतपूर्व न्यायधीश एस.एन.सिंह के नेतृत्व में पी.यू.सी.एल. के अध्यक्ष-चितरंजन सिंह और उपाध्यक्ष-श्रीराम उपाध्याय ज्यूरी मेम्बर के रूप में रहे तथा मधू कोहली-मानवाधिकार कार्यकर्ता, के.के.राय (इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता) , नित्यानंद {अधिवक्ता} आदि लोग उपस्थित थे।
इस जनसुनवायी का मुख्य उद्देश्य- वनाधिकार अधिनियम 2006 की जमींनी हकीकत को जानना था। सबसे पहले इस अधिनियम के इतिहास पर चर्चा की गयी कि कितनी कठिनाईयों का सामना करते हुए इस अधिनियम को एक नाम प्रदान किया गया। मगर आज इसमें हो रही धांधलियों का सामना छोटे तबके के लोगों को झेलना पड़ रहा है। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों द्वारा पीड़ित लोगों ने अपनी व्यथा-कथा सुनाई.
गाँव तिलौली के संतोषी ने कहा कि ‘ मैं भी वन समिति में हूँ। वन समिति के चुनाव के समय बहुत धांधली हुई क्योंकि अधिकारीगढ़ बड़े लोगों की बात मान रहे थे। एसटी/एससी होने के बावजूद सभी पद उच्च लोगों को दिये गये। इससे बहुत घोटाले हुए। हमने ब्लॉक तथा जिला समिति सभी जगह दस्तक दी। मगर वहाँ दावा फार्म भरने में बहुत धांधली हुई। जिसका विरोध करने पर मुझे तहसील से एक छोटी पर्ची देकर टाल दी गयी। उस पर्ची के संबंध में अब तक कोई सूचना नहीं मिला मुझे।’
गाँव डोमरिया, तहसील चकिया, जिला चंदौली के श्रीराम ने कहा कि ‘सबसे पहले जिलाधिकारी ने नौगढ़ में किसी तरह की समस्या से इनकार कर दिया। फिर समितियों का मनमाने ढंग से गठन कर दिया गया जिसका 250 लोगों ने विरोध किया तब जाकर डी.एम. ने समिति को निरस्त किया। मगर कुछ लोग अभी भी समिति को बनाये रखा है।‘
गाँव कतौधी, ब्लॉक दुग्धी के रीताप्रसाद ने कहा, ‘मेरे गाँव की जमीन दूसरे ग्राम सभा के नाम दिखा दिया गया है। और जिस गाँव के नाम किया गया है वो लोग यहाँ आकर जंगल काट कर बसने लगे हैं और जमींन उनके नाम की गयी जो पहले ही पैसे वाले हैं। जिनके पास ट्रक, बस … हैं और जो ऊँची जाति के हैं। जमीन नापने के लिये सर्वे के दौरान बड़े-बड़े माफियाओं को नियुक्त कर दिया गया जो ऊँची जाति के थे। वे हम लोगों को परेशान करते हैं। जिससे हम लोग त्रस्त हैं। यहाँ से 130 फाइल दर्ज थी जिसमें 18 लोगों को ही 1-2 बिस्वा जमींन मिला है। हम लोग फैक्ट्री में छोटा-मोटा काम करके अपना गुजा बसर कर रहे हैं। डी.एम. ऑफिस में अभी तक कुछ नहीं हुआ। हम लोगों को कोई प्रशिक्षण भी नहीं मिला।’
गाँव-महुवरियाँ, जिला सोनभद्र के विजय कुमार ने कहा, ‘मुझे इस समिति का अध्यक्ष चुना गया है। यहाँ से 621 दावा पास किया गया मगर कुछ नहीं हुआ। अभी तक ट्रेनिंग भी नहीं दी गयी।’
गाँव-रीठियाँ, ब्लाक नौगढ़, जिला चंदौली के लालचंद ने कहा ‘ मैं रीठियाँ वन संरक्षण समिति का अध्यक्ष हूँ। 160 दावे नोडल ऑफिसर के पास गया है। दावों पर काम करने के बजाय उन्होंने उल्टे पैसों का माँग की।’
गाँव सूअरसूद, चंदौली के रामसूरत ने कहा, ‘मैं अध्यक्ष पद पर हूं। हमने 257 फाइल पास किया जिसमें 70-75 फाइल लेखापाल ने वापस कर दिया। शेष पर लेखपाल ने प्रलोभन मात्र दिया। जिसमें आज तक कुछ नहीं हुआ।’
गाँव-ठठवा, चंदौली के मोतीलाल ने कहा, ‘मैं सचिव पद पर हूँ। हमने 400 दावे रखे थे। जिसमें 118 दावे अस्वीकृत कर बाकी वापस कर दिये गये। मेरे द्वारा कस्तूरबा गाँधी स्कूल के लिये जमींन हस्तान्तरित किया जाना था। मगर उसे अस्वीकृत किया गया। यहाँ निरन्तर सामुदायिक दावों को निरस्त कर दिया जा रहा है। गाँव की जरूरतों को ध्यान न देकर बल्कि एक कम्पार्ट बनाया जा रहा है।’
अंत में अतिथियों ने इस अधिनियम में आ रही दिक्कतों पर अपने-अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये तथा सुधारात्मक बातों पर चर्चा हुई। नित्यानंदजी ने
बताया कि मानो ये प्रस्तावना जनता के लिये न होकर पैसा का लेन-देन मात्र बन कर रह गया है। पहले सोनभद्र के निवासी मेन रोड पर रहते थे मगर अब उनका यहाँ से नामो निशान मिट गया। अब हमलोगों के पास केवल एक ही रास्ता बचा है वो है आन्दोलन। कब्जा ही सबसे काबिल होगा। मधु कोहली ने इसे जंगल का काला कानून बताया। चितरंजन जी ने कहा, ‘जब इस कानून को 2006 में बनाया गया तो इसे 90 दिन के अंदर घोषित करने का आह्वान किया गया था मगर आज कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा हैं इसकी मैं घोर निन्दा करता हूँ और सरकार से माँग करूंगा कि तत्काल ही गरीब तबके के लोगों को उन्हें उनकी जमीन मिले। जनसुनवाई के अंत में श्रीराम उपाध्याय ने अतिथियों और जनसुनवाई में अपनी आपबीती साझा करने वालों लोगो तथा अन्य सहभागियों के प्रति औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया। उसी के साथ इस कानून के समुचित कार्यान्वयन को लेकर संघर्ष जारी रखने के संकल्प के साथ जनसुनवाई का समापन किया गया।








