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किसान होकर भी कुछ लोग नहीं समझ पाते किसानी का दर्द

किसान होकर भी कुछ लोग नहीं समझ पाते किसानी का दर्द
गिरीन्द्र नाथ झा नहर, खेत, पगडंडी, गाछ-वृक्ष, चिडियों की आवाजें, बरसात में माटी की सुगंध, धनरोपनी के वक्त कादो से सने रोपनी करते लोगों के पैर..। आप समझ रहे होंगे... 
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