You are here: Home // ग़रीबी/Poverty

शहर के सीमान्त

शहर के सीमान्त
जावेद अनीस आमतौर पर शहर उम्मीदों के केन्द्र माने जाते है लेकिन भारत के ज्यादातर शहर अपने एक बड़ी जनसंख्या के लिए मजबूरी, अभाव और नाउम्मीदी के नये टापू ही साबित... 

राशन व्यवस्था में सुधार के लिए हस्‍ताक्षर अभियान

राशन व्यवस्था में सुधार के लिए हस्‍ताक्षर अभियान
सदरे आलम   जनसभा दिल्ली/ राशन के बदले पैसा देने की सरकार की योजना के खिलाफ लोगों का विरोध जारी है, बस्ती स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें की जा रही हैं। इसी संदर्भ... 

गाड़ी की रौशनी देख कर हम छुप जाते थे : रामदयाल

गाड़ी की रौशनी देख कर हम छुप जाते थे : रामदयाल
डॉ. लेनिन रघुवंशी पूर्वी उत्तरप्रदेश में ग़रीब और कमज़ोर लोगों के साथ होने वाले तरह-तरह के ज़ोर-जुल्‍म की कहानियां सरोकार को भेज रहे हैं. पेश है उस श्रृंखला... 

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स की इंसानी क़ीमत

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स की इंसानी क़ीमत
बिपिनचन्‍द्र चतुर्वेदी यह लेख हाउसिंग ऐण्‍ड लैंड राइट्स नेटवर्क (एचएलआरएन) द्वारा हाल में जारी एक रिपोर्ट के आधार पर सरोकार के लिए खास तौर से तैयार किया... 

ये तो पत्‍थर तोड़ते थे, पुलिस ने इन्‍हें क्‍यों तोड़ा

ये तो पत्‍थर तोड़ते थे, पुलिस ने इन्‍हें क्‍यों तोड़ा
लेनिन रघुवंशी मेरा नाम रघूलाल, उम्र-23 वर्ष, पुत्र-श्री बिंदा बिंद। मैं गाँव-सागर सेमर, पोस्ट-हिनौती, थाना-पड़री, जिला-मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) का निवासी हूँ।... 

मुसहर जीवन से एक साक्षात्‍कार

मुसहर जीवन से एक साक्षात्‍कार
डॉ लेनिन रघुवंशी उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में बड़ागाँव ब्लॉक के मुसहर परिवारों की कहानी, समाज को उच्च शिखर पर पहुँचा रहा है, क्या आपको लगता है? आइये ज़रा... 

शहर बनाने वाले बेघर क्‍यों ?

शहर बनाने वाले बेघर क्‍यों ?
सदरे आलम आज दिल्ली की कुल आबादी लगभग 1 करोड़ 40 लाख है। इसका बहुत बड़ा हिस्सा सरकार की नज़र में अवैध तरीके से दिल्ली में रहता है। सरकार द्वारा घोषित अवैध आवास का... 

पंचायती व्यवस्था का बलात्कार

पंचायती व्यवस्था का बलात्कार
शिरीष खरे राजस्थान से लौटकर बाड़मेर और अजमेर. राजौ और गीता. एक ही दुनिया के दो अलग-अलग किस्सों के दो किरदार हैं. इधर है अपनी अस्मत गंवा चुकी राजौ, जो गांव के  विरोध... 

अज़ीबोगरीब संख्‍याओं से खेलता शहर मुम्‍बई

अज़ीबोगरीब संख्‍याओं से खेलता शहर मुम्‍बई
शिरीष खरे ‘‘शांति और हंसी-खुशी यहां से नहीं जा सकती. यहां से जो तूफान उठा है उसे यही छोड़कर नहीं जा सकती. इस शहर ने मुझे दर्द और परेशानियों के जो लंबे-लंबे दिनरात... 
कॉपीराइट © 2011 सरोकार. सर्वाधिकार सुरक्षित।

तकनीकी सहयोग शैलेश भारतवासी, नन्‍दीप माली.