You are here: Home // मीडियानगर/Mediacity

डर्टी नहीं है ये पिक्‍चर

डर्टी नहीं है ये पिक्‍चर
अमितेश कुमार सिल्क को उसके मां बाप ने पैदा नहीं किया…सिल्क को उसने पैदा किया जो उसे चाहते हैं जब शराफ़त के कपड़े उतरते हैं तो सबसे मज़ा शरीफ़ों को ही आता है तुम... 

जीवंत हुआ ‘मोहनदास’

जीवंत हुआ 'मोहनदास'
अमितेश कुमार यथार्थ को आप कैसे पकडेंगे. आप् कह सकते हैं कि यथार्थ को पकड़ना क्या है  जो हमारे सामने है यथार्थ है. लेकिन क्या यथार्थ इतना ही है. दर्शनशास्त्र... 

युग के अंधापन की कथा नहीं कह पाया यह ‘अंधा युग’

युग के अंधापन की कथा नहीं कह पाया यह 'अंधा युग'
अमितेश कुमार अंधा युग अपनी सरंचना में ही भव्यता को समेटे हुए है. इसको पहचानते हुए इब्राहिम अल्काज़ी ने इसको तालकटोरा, पुराना किला और फ़िरोज़ शाह कोटला में किया... 

इतिहास बने के कगार पर पहुंच गइल लौंडा नाच

इतिहास बने के कगार पर पहुंच गइल लौंडा नाच
    अमितेश कुमार उम्र के मार से जर्जर भईल ओह शरीर में आजो उहे लोच बा. आंख में चमक बढ़ जाला जस ही केहु नाच के नाम ले लेवेला. उ शान से रऊआ के बतीयहें कि मुजफ़्फ़रपुर... 

जो डूबा सो पार It’s Love in Bihar

जो डूबा सो पार It's Love in Bihar
  जो डूबा सो पार: It’s Love in Bihar! 14 अक्तूबर को पूरे भारत में लोकार्पण के लिए तैयार     ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वाकी धार। जो उबरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।। अमीर... 

भारंगम में रंगतलाशी

भारंगम में रंगतलाशी
    अमितेश कुमार   अमितेश का रंगमंच और फिल्‍मों से पुराना नाता है. बचपन का. देखते-देखते कला को परखने की आदत पड़ गई. बेशक कला की इनकी परख धुरंधर आलोचकों और... 

वक्त के औराक़ बनते हंसी के अलंबरदार

वक्त के औराक़ बनते हंसी के अलंबरदार
    एम. अफसर खां सागर   किसी विचारक ने कहा है कि ‘व्यक्ति को अगर जीवन में सफल होना है तो आम जिन्दगी में एक कलाकार की तरह अभिनय करे औैर जब रंगमंच के स्टेज पर... 

ग्‍लोबल लोक कलाकार भिखारी ठाकुर

ग्‍लोबल लोक कलाकार भिखारी ठाकुर
    मुन्ना कुमार पाण्डेय   अबहीं नाम भईल बा थोरा | जब यह छूट जाई तन मोरा || तेकरा बाद पच्चास बरीसा  | तेकरा बाद बीस दस तीसा || तेकरा बाद नाम हो जईहन | पंडित-कवि-सज्जन... 

भारतेन्‍दु नाट्य अकादमी में छात्र-हड़ताल

भारतेन्‍दु नाट्य अकादमी में छात्र-हड़ताल
    राघवेन्‍द्र प्रताप सिंह   संस्कृति ने सभ्यता से एक सवाल किया, ‘क्या मेरे बिना तुम्हारा स्वरूप निखर सकता है?’ सभ्यता ने कहा हाँ! पर थोड़े ही दिनों बाद... 

मचान:प्रयोग और सहभागिता से उभरा थियेटर

मचान:प्रयोग और सहभागिता से उभरा थियेटर
  मुन्‍ना पांडे   एक समय रंगजगत पर बादल सरकार ने तीसरे रंगमंच से रंगजगत का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया था. पर हमारे इस चौथे किस्म के रंगमंच का आधार कोई थ्योरी... 

सलवा जुडूम के मुल्क में बस्‍तर बैंड

सलवा जुडूम के मुल्क में बस्‍तर बैंड
  बस्‍तर हम सब जानते हैं. पर उस बस्‍तर का अर्थ परेशान करता है. मुन्‍ना पांडे ने बस्‍तर का एक दूसरा अर्थ हमारे सामने रखा है: बस्‍तर बैंड. लोक परम्परा का दमदार... 

मीडिया, जम्‍हुरियत और कारोबारी मॉडल

मीडिया, जम्‍हुरियत और कारोबारी मॉडल
  स्वतंत्र मिश्र   स्‍वतंत्र का कहना है कि उन्‍होंने कथादेश के मीडिया विशेषांक के लिए यह आलेख तैयार किया था. लेकिन जब पत्रिका छप कर आयी तो उसमें यह लेख शामिल... 

कौन है भोजपुरी सिनेमा का दर्शक

कौन है भोजपुरी सिनेमा का दर्शक
  अमितेश कुमार   ‘दर्शक’ नाट्यशास्त्र में एक अवधारणा की तरह उपस्थित है. काव्यशास्त्र में ‘सहृदय’ पर व्यापक चर्चा हुई है. दर्शक या सहृदय या जिसे सामाजिक... 

Argentine Music Icon And Peace Activist Facundo Cabral Killed In Guatemala

Argentine Music Icon And Peace Activist Facundo Cabral Killed In Guatemala
    Jasmine Garsd   Facundo in a concert. Photo cortsey: google-trends-2011.blogspot.com A voice for peace in Latin America was silenced today in Guatemala. Argentine singer, songwriter and novelist Facundo Cabral was shot and killed in Guatemala City early this morning. He had just finished a concert in the nation’s capital and was headed to the airport by car. Eyewitnesses... 

प्रभावशाली मीडिया का एक कारगर प्रस्‍ताव

प्रभावशाली मीडिया का एक कारगर प्रस्‍ताव
    आज अपने साथी अंजुले श्‍याम मौर्य के सुझाव पर फेसबुक से दिलीप मंडल का यह नोट यहां सरोकारियों के लिए साझा किया जा रहा है. साथ में मित्रों की राय भी जस के... 

कब्र-ए-उमराव: गुबार ही गुबार है

कब्र-ए-उमराव: गुबार ही गुबार है
  एम अफ़सर खां सागर   कितने आराम से हैं कब्र में सोने वाले कभी दुनिया में था फिरदौस में अब है मसकन कब्र कैसी अहले वधा की है अल्ला-अल्ला सबको मग जिसका है वह... 

तेरा दुबई का शेख करेगा क्या प्रोड्युस?

तेरा दुबई का शेख करेगा क्या प्रोड्युस?
  सरोकार पर पिछले महीने प्रशांत पांडे ने बॉलीबुड की ‘बदनाम गलियों’ के जिस तथाकथित पटकथा लेखक अनुराग की ‘पटकथा’ का आगाज किया था, पेश है उसकी दूसरी खेप. अनुराग... 

याद-ए-जुलिआनो …

याद-ए-जुलिआनो ...
प्रकाश के रे   तीस अप्रैल की शाम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली के सम्मुख सभागार में जाने-माने फ़लस्तीनी-इज़रायली फ़िल्मकार और नाटककार जुलिआनो मेर ख़मीस... 

पटकथा: अलबेली कैटवुमन

पटकथा: अलबेली कैटवुमन
  प्रशांत पांडे   ‘मायापुरी’, ‘फिल्‍मी दुनिया’, ‘फिल्‍मी कलियां’ … अनगिनत पत्रिकाएं और हज़ारों किताबें: बॉलीवुड से राफ़्ता बनाने में हमारी मदद करते... 

मंगरू चाचा और बीबीसी रेडियो

मंगरू चाचा और बीबीसी रेडियो
अंजुले श्याम मौर्य बीबीसी : रेडियो नहीं आस्था सुबह सुबह की बेला में लल्लन ने गलती से पुछ लिया मंगरू चाचा से – चाचा का टाइम हो रहल बा … मंगरू चाचा अपने... 
कॉपीराइट © 2011 सरोकार. सर्वाधिकार सुरक्षित।

तकनीकी सहयोग शैलेश भारतवासी, नन्‍दीप माली.