You are here: Home // नयी कलम/New Pen

मुहाने आन खड़ी है

मुहाने आन खड़ी है
      परवेज अहमद की कविता मुहाने आन खड़ी है   मुहाने आन खड़ी है, इक नयी जि़ंदगी, दस्तक देती… दरवाजे पर मेरे…   कहती है, “दरवाज़ा ख¨ल¨… अन्दर आने दे... 

ओ सजना बरखा बहार आई….लता के मधुर स्वरों की फुहार जब बरसी शैलेन्द्र के बोलों में

ओ सजना बरखा बहार आई....लता के मधुर स्वरों की फुहार जब बरसी शैलेन्द्र के बोलों में
‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर जारी है शृंखला “शैलेन्द्र- आर.के.फ़िल्म्स के इतर भी”। आज का जो गीत हमने चुना है वह कोई दार्शनिक गीत नहीं है, बल्कि एक बहुत ही नमर-ओ-नाज़ुक... 
कॉपीराइट © 2011 सरोकार. सर्वाधिकार सुरक्षित।

तकनीकी सहयोग शैलेश भारतवासी, नन्‍दीप माली.