You are here: Home // नयी कलम/New Pen
मुहाने आन खड़ी है
ओ सजना बरखा बहार आई….लता के मधुर स्वरों की फुहार जब बरसी शैलेन्द्र के बोलों में
‘ओल्ड इज़ गोल्ड’ पर जारी है शृंखला “शैलेन्द्र- आर.के.फ़िल्म्स के इतर भी”। आज का जो गीत हमने चुना है वह कोई दार्शनिक गीत नहीं है, बल्कि एक बहुत ही नमर-ओ-नाज़ुक...





