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उत्तरप्रदेश: चुनाव के बहाने कुछ खरी-खरी

उत्तरप्रदेश: चुनाव के बहाने कुछ खरी-खरी
डॉ. लेनिन रघुवंशी चुनाव आ गया है। वादे शुरू हो गये। चुनाव के बाद सरकार बनने वाली हैं। जो मानवाधिकार, कानून के राज व लोकतंत्र का नाम लेकर उसी का गला घोट देगी।... 

सीरियाइयों की परेशानी दूसरे सम्प्रदाय से नहीं, लोगों के खून से सने हाथों से है: सुलिमान

सीरियाइयों की परेशानी दूसरे सम्प्रदाय से नहीं, लोगों के खून से सने हाथों से है: सुलिमान
प्रकाश के रे अरब के तानाशाहों ने क्रांति की आंधी से अपनी सत्ता बचाने के लिये अरबी के समाज के कबीलाई और सांप्रदायिक सामाजिक बुनावट को भुनाने की पूरी कोशिश... 

हिन्‍दुस्‍तान की भी भागीदारी है सीरीया के दमन में

हिन्‍दुस्‍तान की भी भागीदारी है सीरीया के दमन में
प्रकाश के रे सब्ज़ ट्यूनीशिया, तुम तक आया हूँ हबीब की तरह अपने ललाट पर लिये इक गुलाब और इक किताब क्योंकि मुझ दमिश्की का पेशा मुहब्बत है बरसों पहले इन हर्फ़ों... 

The Game of Change in Pakistan and Occupy Wall Street

The Game of Change in Pakistan and Occupy Wall Street
Bilal Khan The American public may be up against the greedy world of capitalists, and while people in rest of the world may also echo many of the sentiments shared by the Occupy Wall Street movement, there are no signs so far that the movement has scared the “elites” at all. However, inspired by the “Occupy” movement, Italians have managed to have their share of the so-called Arab spring,... 

Psychological Trauma of War

Psychological Trauma of War
  Ayesha Zee Khan Pakistanis as a nation have been encountering a plethora of bomb blasts since the Russian invasion of Afghanistan almost 30 years back. Our Army jawan’s targeted, our security personnel brutally killed, civilians, women and children suffering from these deadly attacks leaving us battered, perforated and bruised on a daily basis now. As if this wasn’t enough to torment... 

‘सु’शासनी तानाशाही की राह पर पहला गणतंत्र

'सु'शासनी तानाशाही की राह पर पहला गणतंत्र
  प्रेमरंजन   बिहार में में अरुण नारायण और मुसाफिर बैठा के निलंबन के परिप्रेक्ष्‍य में इस देश में संघियों के खेमे से अक्सर यह शिकायत सुनने को मिल जाएगी... 

इतिहास और शौर्य में न तलाशों धमाकों के हल

इतिहास और शौर्य में न तलाशों धमाकों के हल
  शफीकुर्रहमान ख़ान   दिल्ली में फिर बम विस्फोट हुआ. 10 लोग हताहत हुए और 60 से ज्‍यादा जख्‍मी. ये विस्फोट न तो हमारे लिए नया है और न ही आखिरी. विस्फोट और होंगे,... 

अजीब दौर है …

अजीब दौर है ...
अंजुले श्याम मौर्य इनकलाब जिंदाबाद… वन्दे मातरम… भारत माता की जय… अजीब दौर है… या फिर… दौरे हैं. जो नारे साल में एक दो बार ही नज़र आते हैं. आज़ादी या... 

किसका अन्‍ना कैसी आजादी

किसका अन्‍ना कैसी आजादी
अदम्‍य प्रस्‍तुत आलेख कल सरोकार पर प्रकाशित शबनम खान के लेख फेसबुक, पिज्‍जा और अन्‍ना पर प्रतिक्रिया स्‍वरूप सरोकार को भेजा गया है. अदम्‍य का कहना है कि... 

फेसबुक, पिज़्जा और अन्ना

फेसबुक, पिज़्जा और अन्ना
  शबनम ख़ान   शबनम खान की निगाहें अन्‍ना हजारे की अगुआई में हो रही हलचल पर थमी हुई हैं. उन्‍होंने टुकड़ों में अपनी राय सरोकार से साझा की है. कहा है, ‘माकूल... 

फारबिसगंज के लोग सिविल सोसाइटी नहीं हैं…

फारबिसगंज के लोग सिविल सोसाइटी नहीं हैं...
    हेमंत कुमार बाबा रामदेव को रामलीला मैदान से भागते देखा। राजघाट पर सुषमा स्वराज को नाचते देखा। बाबा बाबा रामदेव उर्फ़ 'छत्रपति शिवाजी' के भागने और... 

दलितों का हत्यारा ब्रम्हेश्वर मुखिया सलाखों के बाहर

 दलितों का हत्यारा ब्रम्हेश्वर मुखिया सलाखों के बाहर
  संदीप मौर्य जेल से बाहर आ चुका है मौत का दरिंदा, ज्सिके लिये दरिंदा शब्द भी कम है। यह वह व्यक्ति है, जिसने 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारा। इसके... 

यमन की आजादी का संघर्ष

यमन की आजादी का संघर्ष
  प्रकाश के रे   जहाँ तानाशाही एक वास्तविकता है, वहाँ क्रांति अधिकार बन जाती है. -विक्टर ह्यूगो ये आलम कभी था बीते महीनों में दो मज़बूत तानाशाहों को... 

मुबारक की तानाशाही के आख़िरी चंद घंटे

मुबारक की तानाशाही के आख़िरी चंद घंटे
प्रकाश के रे   तानाशाहों की ज़िंदगी का हर पहलू लोगों के लिये कौतुहल का विषय होता है क्योंकि आमतौर पर उनके बारे में बहुत कम जानकारियाँ ही मिल पाती हैं. इतिहासकार... 

भागो, अन्ना पीछे हैं

भागो, अन्ना पीछे हैं
फरमिना मुक्‍ता सिंह   चेतन भगत के बाएं हाँथ पे लिखा है ‘मेरा नेता चोर है’. देखकर अंग्रेज़ी की एक कहावत याद आ गई. ‘डेमोक्रेसी इज़ अ प्रोसेस व्‍हेयर यु... 

अन्ना @ जंतर मंतर 4 करप्‍शन छू मंतर

अन्ना @ जंतर मंतर 4 करप्‍शन छू मंतर
आशीष कुमार अंशु कभी रायपुर के एक दोस्त ने फोन पूछा था कि बरखा दत्त के कार्यक्रम से बुलावा आया है। मुझे वहां जाना चाहिए या नहीं? मैंन पूछा- मुद्दा क्या है? ‘नक्सलवाद’ ‘जाने... 

भीड़-तंत्र के बीच इंसान

भीड़-तंत्र के बीच इंसान
अंजुले श्‍याम मौर्य     एक अदद इंसान की तलाश आज एक किस्सा सुनाता हूँ आपको एक देश का. नाम कुछ भी हो सकता है उस देश का लेकिन चलिए आपकी सहूलियत के लिए उस देश का... 

लाशों के सौदागरों के दिन अब लद रहे हैं

लाशों के सौदागरों के दिन अब लद रहे हैं
प्रकाश के रे …कितनी बार एक  आदमी सर उठाएगा कि वह आकाश देख सके, एक आदमी के पास कितने कान होने चाहिए कि वह लोगों का रोना सुन सके, कितनी लाशों के बाद वह जान सकेगा... 
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